स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि की पूरी जानकारी

स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि की पूरी जानकारी :लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक देश के पहले ऐसे स्वतंत्रता सेनानी रहे, जिन्होंने ‘पूर्ण स्वराज’ की मांग कर अंग्रेजों के मन में खौफ पैदा कर दिया था. अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला देने वाले बालगंगाधर तिलक का आज पुण्यतिथि है. इस महान स्वतंत्रता सेनानी की मौत 1 अगस्त 1920 को मुंबई में हुआ था. लोकमान्य भले ही इस आजाद भारत में सांस लिए बगैर इस दुनिया से चले गए, लेकिन कही बातें आज भी सामाजिक एकता कायम करने में कारगर हो सकती है. बालगंगाधर तिलक ने लोगों को एकजुट करने के लिए पूरे महाराष्ट्र में गणेश उत्सव का चलन शुरू किया था. उन्होंने कई पत्र-पत्रिकाओं में अपनी लेखनी से देश के लोगों को आजादी के लिए प्रेरित किया था. उस दौर में तीन स्वतंत्रता सेनानी काफी चर्चित थे बालगंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय और विपिन चंद्रपाल. तीनों को लोग ‘लाल-बाल-पाल’ के नाम से भी पुकारते थे. ऐसे में आपको बाल गंगाधर तिलक के दिए 5 नारे याद दिला रहे हैं.

  1. स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है, हम इसे लेकर रहेंगे.
  2. धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं. सन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है.  असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाये देश को अपना परिवार बना मिलजुल कर काम करना है.
  3. प्रगति स्वतंत्रता में निहित है. बिना स्वशासन के न औद्योगिक विकास संभव है , न ही राष्ट्र के लिए शैक्षिक योजनाओं की कोई उपयोगिता है… देश की स्वतंत्रता के लिए प्रयत्न करना सामाजिक सुधारों से अधिक महत्वपूर्ण है.
  4. भूविज्ञानी पृथ्वी का इतिहास वहां से उठाते हैं जहां से पुरातत्वविद् इसे छोड़ देते हैं , और उसे और भी पुरातनता में ले जाते हैं.
  5. ये सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है लेकिन ये भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने की शक्ति नहीं है.

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय

1.बाल गंगाधर तिलक

स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक बाल गंगाधर तिलक लोकमान्य तिलक जन्म से केशव गंगाधर तिलक एक भारतीय राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतन्त्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता तिलक ही थे।

2.हिन्दू राष्ट्रवाद के पिता

हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता और अशान्ति के पिता के नाम से कहलाये जाने वाले तिलक ने भारत के संघर्ष के दौरान भविष्य क्रांतिकारियों के लिए “स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूँगा” नारा दिया था जो बहुत प्रसिद्ध हुआ और स्वतंत्रता के लिए एक प्रेरणा के रूप में इसने कार्य किया।

3.एक समाज सुधारक

बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय समाज सुधारक और स्वतंत्रता के कार्यकर्ता थे। आधुनिक भारत के प्रधान आर्किटेक्ट में से एक थे। उनके अनुयायियों ने उन्हें ‘ लोकमान्य ‘की उपाधि दी जिसका अर्थ है जो लोगों द्वारा प्रतिष्ठित है। तिलक एक प्रतिभाशाली राजनेता के रूप में उभरे जिनका मानना था कि एक राष्ट्र की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता स्वतंत्रता है।

4.बचपन और प्रारंभिक जीवन

केशव गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई, 1856 को रत्नागिरी, दक्षिण-पश्चिमी महाराष्ट्र के एक छोटे से तटीय शहर में एक मध्यम वर्ग ब्राह्मण परिवार तपावन में हुआ था। उनके पिता गंगाधर शास्त्री रत्नागिरी में एक प्रख्यात संस्कृत विद्वान और स्कूल शिक्षक थे।

5.गंगाधर तिलक

उनकी माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर था। अपने पिता के हस्तांतरण के बाद उनका परिवार पूना (अब पुणे) में स्थानांतरित हो गया था। 1871 में तिलक ने तापीबाई से शादी की थी जो बाद में सत्यभामाबाई के रूप में प्रख्यात हुई थी।

6.होमरूल लीग की स्था्पना

भारत की स्वतंत्रता की नींव रखने में उन्होंने बहुत सहायता की। उन्होंने ‘इंडियन होमरूल लीग’ की स्थापना सन् 1914 ई. में की और इसके अध्यक्ष रहे तथा सन् 1916 में मुहम्मद अली जिन्ना के साथ लखनऊ समझौता किया, जिसमें आज़ादी के लिए संघर्ष में हिन्दू- मुस्लिम एकता का प्रावधान था।

7.लोगों को ऐसे बांधा एकता सूत्र में

भारतीयों की दशा में सुधार करने और लोगों को जागरुक करने के लिये इन्होंने पत्रिकाओं का प्रकाशन किया। देशवासियों को शिक्षित करने के लिये शिक्षा केन्द्रों की स्थापना की। देशवासियों को एकता के सूत्र में बाँधने के लिये ‘गणेशोत्सव’ और ‘शिवाजी’समारोह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों को शुरु किया।

8.‘केसरी’का घोषणापत्र

गंगाधर तिलक ने अंग्रेजों पर तीनों ओर से मोर्चा लगा कर अंग्रेजों की नाक में दम करके रख दिया। तिलक ने अपने सहयोगियों के संयुक्त हस्ताक्षरों के साथ ‘केसरी’का घोषणापत्र प्रकाशित किया।

9.तिलक की बीमारी और आंदोलन

जलियांवाला बाग नरसंहार की क्रूर घटना से तिलक निराश थे और इसके बाद से उनके स्वास्थ्य में गिरावट आनी शुरू हो गयी थी। अपनी बीमारी के बावजूद तिलक ने भारतीयों को आंदोलन जारी रखने को कहा। इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए वो बेताब थे लेकिन उनके स्वास्थ्य की खराबी के कारण वो नहीं कर पाये।

10. तिलक का निधन

तिलक मधुमेह से पीड़ित हो गए और उनका शरीर गिरता चला गया। वो बहुत कमजोर हो गये। जुलाई 1920 में उनकी हालत खराब हो गई और 1 अगस्त को उनका निधन हो गया। इस दुखद खबर के फैलते ही बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंच गए। मुंबई में उनके निवास पर अपने प्रिय नेता की अंतिम झलक पाने के लिए लगभग 2 लाख लोग एकत्र हुए थे।

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