लोन कितने प्रकार के होते हैं आइये जाने हिंदी में

नमस्कार दोस्तो ,

इस पोस्ट में हम आपको लोन कितने प्रकार के होते हैं के बारे में जानकारी देंगे ! और हम आंगे भी हर दिन  की नई इस्कीम के बारे बताये गें और आपको यहां उपलब्ध कराऐंगे ,अगर आपको इसकी बातें जानना है तो  आप हमारी बेबसाइट को रेगुलर बिजिट करते रहिये |


लोन कितने प्रकार के होते हैं

1. शॉर्ट टर्म लोन (Short Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय एक साल से कम होता है

2. मीडियम टर्म लोन (Medium-Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय 1 साल से 3 साल या 5 साल के बीच होता है

3. लौंग टर्म लोन (Long Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय 5 साल से अधिक होता है

 भारत में बैंक या फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट कितने प्रकार के लोन देते हैं?

Types of Bank Loans

 
1. पर्सनल लोन

पर्सनल लोन या फिर गैर जमानती लोन का मतलब होता है खुद के लिए लिया गया लोन। वैसे तो सभी लोन अपने लिए ही लिया जाता है लेकिन पर्सनल लोन का मतलब होता है अपने पर्सनल कामों के लिए लोन को लेना, जैसे कि बच्चों की स्कूल फीस देना या कोई महंगी गिफ्ट खरीदना या घर का कोई समान लेना हो तो इन सब जरूरत के लिए लिया गया लोन पर्सनल लोन होता है। दरअसल उनके लिए हर बैंक का अपना अपना ब्याज़ दर तय होता है। आज के समय में स्टेट bank of इंडिया(SBI) पर्सनल लोन के लिए 12.50% से 16.60% तक का सालाना ब्याज वसूल रहा है तो HDFC BANK 10.99% से 20.75% तक का सालाना ब्याज वसूल रहा है। वैसे पर्सनल लोन का ब्याज़ दर और सभी लोन से ज्यादा होता है। पर्सनल लोन के लिए बैंक आपसे ज्यादा डोकोमेंट नहीं मागती है बस आपकी सैलरी स्लिप देखकर आपको लोन दे देता हैं। पर्सनल लोन आपको पांच साल तक के लिए मिल सकता है।

2. गोल्ड लोन 
इस लोन में बैंक लॉकर में आप अपना गोल्ड को रखकर लोन प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह के लोन में राशि आपके द्वारा जमा किया गया गोल्ड की क्वालिटी और उसकी वेल्यु के हिसाब से दिया जाता है। वैसे आमतौर पर देखा गया है कि बैंक आपकी गोल्ड की कीमत का 80%रकम आपको लोन के रूप में दे देता है। गोल्ड लोन आमतौर पर लोग इमरजेंसी की स्थित में लेते हैं। इस लोन पर लगने वाला ब्याज पर्सनल लोन के मुकाबले कम होता है। अभी के समय मे गोल्ड लोन का ब्याज़ दर SBI मे 11.15% और HDFC मे 10% सालाना है।

3. सिक्युरिटी पर मिलने वाला लोन 

इस लोन में बैंक आपके सिक्यूरिटी पेपर को रख कर लोन देते हैं। मगर सवाल यह उठता है कि सिक्यूरिटी पेपर क्या होते हैं? अगर आपने पहले से ही किसी म्यूच्यूअल फण्ड ,डिमांड शेयर गवर्नमेंट स्कीम या बांड में आपने पहले से ही इनवेस्ट किया है तो यही आपके सिक्योरटी पेपर होते है जिसको रखकर बैंक आपको लोन देता है। अगर आप लोन नहीं चुका पाते हैं तो बैंक आपकी सिक्यूरिटी पेपर को जप्त कर लेता है, और बाजार में बेच देता है। आप अपने सिक्युरिटी पेपर को बैंक में गिरवी रख सकते हैं। बैंक आपको इस सिक्योरिटी पेपर के आधार पर आपको बैंक ओवर ड्राफ्ट की सुविधा देता है। ओवर ड्राफ्ट का मतलब अगर आपके अकाउंट में जीरो बैलेंस है हो भी आप अपने अकाउंट से पैसे निकाल सकते है इसी को ओवर ड्राफ्ट कहा जाता है।

4. प्रॉपर्टी लोन

प्रॉपर्टी लोन वह लोन है जिसमें बैंक आपके प्रॉपर्टी के कागजात को गिरवी रख कर देता हैं। यह लोन किसी को ज्यादा से ज्यादा 15 साल की लिए मिल सकता है। आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमत का 40% से 50% प्रतिशत तक लोन मिल जाता है।

5. होम लोन 

घर खरीदने के लिए जो लोन लिया जाता है उसे होम लोन कहते हैं। आप सिर्फ घर खरीदने के लिए ही लोन नहीं लेते हैं, बल्कि आप घर बनाने की कीमत मकान का रजिस्ट्रेशन स्टांप ड्यूटी का खर्च और भी बहुत सारे खर्च को जोड़ कर के आप बैंक से लोन ले सकते हैं। बैंक घर बनाने के कुल खर्च का 75%से 85% तक के लोन देता है। बाकी पैसो का जुगाड़ घर बनाने के लिए आपको खुद ही करना होता है। मान लीजिए आपने एक प्लॉट के लिए लोन लिया जिसकी कीमत 10 लाख रुपए है। इसके लिए आपको बैंक में इसका 30 परसेंट यानी तीन लाख ही जमा कराना होगा। बाकी पैसा बैंक आपको देगा । होम लोन चुकाने का समय 5 साल से लेकर 20 साल तक का होता है। होम लोन की शर्तों में ब्याज के अलावा और भी कई तरह के फीस शामिल होते हैं, जैसे: प्रोसेसिंग फीस अडमेन्सट्रटिव चार्ज ,लीगल फीस असेसमेंट फीस इत्यादि।

6. एजुकेशन लोन

हर किसी छात्र के लिए असंभव नहीं है कि वह अपने मनपसंद इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर पाए। कोई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहता है तो वहां की फीस ही इतनी है कि वह वहां जाकर पढ़ाई करने के बारे में सोचना काफी मुश्किल काम है। ऐसी स्थिति में वह बैंक से एजुकेशन लोन ले सकता है। एजुकेशन लोन देने से पहले बैंक उसकी री पेमेंट निर्धारित करता है। बैंक लोन उसी स्टूडेंट को देती है जिसे वापस करने की क्षमता रखते हैं। स्टूडेंट की छमता को जानने के लिए बैंक दो तरह से काम करता है। या तो स्टूडेंट के गार्जियन की इनकम को देखा जाता है या लोन लेने वाले स्टूडेंट किस यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं, उसका परफॉर्मेंस कैसा है? यह भी देखा जाता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद स्टूडेंट लोन का पेमेंट कर सकता है। एजुकेशन लोन लेने के लिए एक गारंटर की जरुरत होती है। यह स्टूडेंट का कोई रिश्तेदार भी हो सकता है। आज की डेट में state bank of india एजुकेशन लोन 7.50 लाख से ऊपर के लिए 10.70% और 7.50 लाख तक के लिये 9.95% सालाना का ब्याज़ दर चार्ज करती है।

7. वाहन अथवा कार लोन 

जब आप कोई वाहन खरीदने के लिए बैंक से रकम लेते हैं तो उसे वाहन अथवा कार लोन कहते हैं। कार लोन हर लोन की तरह ही फिक्स या फ्लोटिंग रेट पर दिया जाता है। फिक्स रेट का मतलब होता है जिस समय आप लोन ले रहे हैं उस समय जो ब्याज दर है उस दर से आपको पूरी लोन का भुगतान करना होता है। और फ्लोरिंग रेट का मतलब होता है की लोन लेने के बाद अगर ब्याज घटता या बढ़ता है तो आप को उस हिसाब से भुगतान करना होगा। कार लोन में जब तक आप पूरी लोन की रकम बैंक को वापस नहीं करते हैं तब तक कार का मालिकाना हक बैंक के पास होता है।

8. कॉरपोरेट लोन 

बैंक जब बड़े लोगों जैसे रतन टाटा, विजय माल्या, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा बिरला जैसे बड़े लोगों को जब लोन देता है तो वह कॉरपोरेट लोन कहलाते हैं। अभी के नियमों के अनुसार बैंक अपनी कोर कैपिटल(कोर Capital) का 55% तक लोन किसी एक बड़ी कंपनी को लोन के रूप में दे सकती है। लेकिन हाल ही में हुए डिफॉल्ट केस में बढ़ोतरी को देखते RBI ने कहा है कि 1 जनवरी 2019 तक ऐसा नियम लागू हो जाएगा जब बैंक अपने कैपिटल का 25% ही किसी एक कॉरपोरेट को लोन के रूप मे दे सकेगे। जिससे जोखिम से बचा जा सके। Types of Bank Loans

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