पुष्कर के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य-हिंदी में

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पुष्कर के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य


ब्रह्मा मंदिर पुष्कर

ब्रम्हा जी का एक मात्र मंदिर जो पुष्कर में स्थित है। पुष्कर का शाब्दिक अर्थ होता है:- तालाब, जो फूलो से बना हो।

राजस्थान राज्य के अजमेर जिले से 15.7 किलोमीटर दूरी पर पुष्कर में बना यह मंदिर बहुत ही सुन्दर है।

ब्रम्हा जी का एकमात्र मंदिर होने के कारण हर साल यहाँ पूरी दुनिया से लोग उनके दर्शन के लिए आते है। इसे दुनिया में 10 प्रसिद्ध पवित्र स्थलों में व भारत में इसे 5 पवित्र स्थलों में गिना जाता है।

कहा जाता है की ब्रम्हा जी यहाँ खुद निवास करते है और मान्यता है की जो भी यहाँ आता है और सच्चे मन से पूजा करता है भगवान उसकी सारी मनोकामना पूरी करते है।

इस मंदिर के सामने एक सुन्दर सी झील बहती है जिसका नाम पुष्कर झील है।

मंदिर से जुड़ी कथा

ब्रम्हा जी के इस मंदिर के बारे में यह कथा बहुत प्रसिद्ध है कि एक बार ब्रम्हा जी को यज्ञ करना था। लेकिन राक्षस यज्ञ भंग न कर दे, इसलिए ब्रम्हा जी एक शांत जगह ढूंढ रहे थे।

पुष्कर झील के पास आकर उनकी यह खोज पूरी हो गयी। हिन्दू धर्म के अनुसार जब भी आप यज्ञ करते है, तो आपको अपने जोड़े यानि ध्र्मपत्नि के साथ ही कर सकते है।

इसलिए उन्होंने वही पास के गांव की लड़की गायत्री से शादी कर ली। जिसके बाद जब यह सुचना उनकी पत्नी सावत्री को पता चली तो वह बहुत ही क्रोधित हो गयी।

जिसके बाद उन्होंने ब्रम्हा जी को श्राप दे दिया कि उनकी पूजा कोई भी भक्त नहीं करेगा और जो भी उनका मंदिर बनाएगा।

उसे भी बहुत सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा और उन्हें इस जगह के आलावा कहीं और पूजा नहीं जा सकेगा। इसलिए सिर्फ यहीं पर ब्रम्हा जी की पूजा होती है।

मंदिर का निर्माण

इस सुन्दर मंदिर का निर्माण ऋषि विश्वामित्र ने किया था। इसके बाद आदि शंकराचार्य ने इसे पूरी तरह बनवाया था।

एक कथा के अनुसार एक बार यहाँ के शासक को नींद में एक सपना आया। जिसमें उसने एक मंदिर देखा, जो टुटा है।

जब उसने इस जगह को देखा तो उसे यहाँ एक टुटा मंदिर मिला। जिसे उसने पूरी तरह से बनवाया और रखरखाव किया।

ब्रह्मा मंदिर पुष्कर की वास्तुकला

ब्रम्हा मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था। मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए आप मंदिर के मंच से संगमरमर की सीढियों से होकर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंच जाते है।

यहाँ आपको भगवान ब्रम्हा के वाहन हंस की मूर्ति देखने को मिलती है। जो इसकी सुंदरता में चार चाँद लगाने का काम करती है। इसके बाद आप मुख्य दरवाजे से होकर मंदिर के मंडप में पहुँच जाते है।

वहाँ पर एक कछुए की मूर्ति लगी है। जिसका मुँह मंदिर की तरफ है। यहाँ पर पुरे विश्व का एकमात्र ब्रह्मः मूर्ति है। उसके बाद एक गलियारे से होकर आप शिव मंदिर में जा सकते है।

ब्रम्हा मंदिर का प्रवेश शुल्क

इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आपको किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं देना पड़ता है। यहां आप वर्ष के किसी भी माह में आकर दर्शन कर सकते है।

मंदिर खुलने और बंद होने का समय

गर्मियों में यह मंदिर सुबह 6 बजे से शाम 9 बजे तक खुला रहता है। वही सर्दियों में सुबह 6:30 से शाम 9 बजे तक भक्तो के लिए खुला रहता है।

पुष्कर के मुख्य आकर्षक केंद्र

पुष्कर में ब्रम्हा मंदिर के अलावा और भी आकर्षक स्थान है। जिनमें से पुष्कर झील, वराह मंदिर, पाप मोचनी मंदिर, आत्मेश्वर मंदिर, रंगजी मंदिर, सिंह सभा गुरुद्वारा, दिगंबर जैन मंदिर आदि प्रमुख है।

इसके अलावा इनके जैसे और भी अनेक आकर्षक मंदिर है। जहाँ पर हर वर्ष कई भगत दर्शन के लिए जाते है। ये सभी मंदिर भी अपना एक अलग ही स्थान रखते है।

इसके साथ साथ मोती महल, रोज गार्डन तथा नाग पहाड़ भी यहाँ के आकर्षण का केंद्र है। आप यहाँ आकर इन सभी जगहों को भी देख सकते है।

इसके साथ साथ यहाँ पुष्कर झील है। जहाँ हर साल कई भक्त स्नान करने आते है व इसके साथ साथ आप पुष्कर मेले व पशु मेले का भी आनद ले सकते है।

पुष्कर में यात्रा करने का सही समय

यदि आप पुष्कर में यात्रा करना चाहते है, तो आप सर्दियों के मौसम में यहाँ जा सकते है। अक्टूबर से मार्च के समय राजस्थान का तापमान बाकि समय के मुकाबले थोड़ा ठंडा रहता है तो आपको घूमने में आसानी होगी।

इस बीच आप नवंबर महीने में आयोजित होने वाले पुष्कर मेले में भी शामिल हो सकते है। ताकि आप उसका भी आनद ले पाए।


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