भारत की प्राचीन गुप्त सुरंगों के बारे में-हिंदी में

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भारत की प्राचीन गुप्त सुरंगों के बारे में


राजाओं और शासकों ने अपने महलों या किलों में गुप्त मार्गों का निर्माण किया था. भारत में, कई ऐसे किले हैं जिनमें गुप्त मार्ग के साक्ष्य मिले हैं जिन्हें सुरंग कहा जाता है. हाल ही में ऐसा एक दिल्ली विधानसभा में देखने को मिला है. आइए एक नजर डालते हैं भारत की गुप्त प्राचीन सुरंगों के बारे में.

हाल ही में दिल्ली विधानसभा को लाल किले से जोड़ने वाली एक गुप्त सुरंग का पता चला है. विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों के आंदोलन के दौरान प्रतिशोध से बचने के लिए ब्रिटिश काल में इस सुरंग का इस्तेमाल किया गया होगा ऐसा अनुमान लगाया गया है. अब सुरंग का मुहाना मिल गया है लेकिन सरकार आगे और खोदना नहीं चाहती है.

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष राम निवास गोयल ने यह भी बताया कि हर कोई वहां फांसी के कमरे की मौजूदगी के बारे में जानता था, लेकिन 75वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद अब तक इसकी जांच करने की कोशिश नहीं की गई. आगे उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का इरादा भारत के स्वतंत्रता सेनानियों के लिए कमरे को धर्मस्थल में बदलने का है.

आइये भारत में पाई जाने वाली गुप्त सुरंगें और उनके पीछे की कहानियों के बारे में जानते हैं.

 1.कोलकाता का राष्ट्रीय पुस्तकालय 

यह मंदिर अपनी वास्तुकला और गुप्त सुरंगों, दरवाजों और कमरों के कारण दुनिया भर के पुरातत्वविदों द्वारा सबसे अधिक मांग वाले मंदिरों में से एक है.

यह मंदिर केरल के तिरुवनन्तपुरम में स्थित है. 2011 में त्रावणकोर शाही परिवार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. उन पर पदमनाभास्वामी मंदिर की संपत्ति का गलत प्रबंधन करने का आरोप लगाया गया, जिसके कारण जांच शुरू की गई थी.

जांच के बाद छह तहखाने मिले, जिसने दुनिया भर में लोगों का ध्यान आकर्षित किया. जो खोजा गया था वह विश्वास से परे था और उसने सभी को चौंका दिया. उसमें 22 अरब डॉलर मूल्य की सोने की मूर्तियाँ, हार और अन्य खजाने के सिक्के पाए गए थे.

2.पदमनाभास्वामी मंदिर 

भगवान पदमनाभास्वामी की एक कथा एक ऐसे कमरे से भी जुड़ी हुई है, जिसके कारण यह कभी खोला ही नहीं गया था. ऐसी मान्यता है कि अगर दरवाजा खोला जाता है, तो प्राकृतिक आतंक पैदा होगा. हालाँकि इसका कोई प्रमाण नहीं है और यह काफी अवैज्ञानिक है लेकिन भारत सरकार ने इसे खोलने का आदेश नहीं दिया है.

वर्ष 2010 में यहाँ पुरातत्वविदों ने एक गुप्त बाड़े की खोज की थी. कोलकाता की लाइब्रेरी अपने आप में बिना किसी प्रवेश द्वार के 250 साल पुरानी इमारत है. इस जगह को लेकर लोगों के पास तरह-तरह की कहानियां हैं. कई लोगों का मानना है कि पुस्तकालय परिसर को पहले ब्रिटिश अधिपतियों द्वारा यातना कक्ष या खजाने की तिजोरी के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.

राष्ट्रीय पुस्तकालय का निर्माण बंगाल के नवाब ने 1760 में किया था और 1891 में इसे इम्पीरियल लाइब्रेरी में बदल दिया गया था. तब वहाँ के गुप्त कक्ष के बारे में कई अनुमान लगाए जाते थे, लेकिन बाद में पता चला कि यह वास्तुकारों द्वारा इस्तेमाल की गई इमारत को मजबूत करने के लिए मिट्टी से भरा एक ब्लॉक था.

 3.चारमीनार 

ऐसा कहा जाता है कि हैदराबाद के दो सबसे बड़े स्मारक, चारमीनार और गोलकुंडा किला एक छिपी हुई सुरंग के माध्यम से आपस में जुड़े हुए हैं. हालाँकि यह मार्ग कभी भी अपने उचित स्थान पर नहीं पाया गया, लेकिन एक दर्जन से अधिक संरचनाएं हैं जो 430 साल पुराने स्मारक के अस्तित्व का समर्थन करती हैं.

2015 में, 2 नए आर्कवेज़ (Archways) पाए गए, जो 9 किलोमीटर लंबी एक सुरंग के बारे में बताते थे लेकिन लापरवाही के कारण वह नष्ट हो गई थी.

4.तलातल घर 

यह अहोम (Ahom) युद्धों के दौरान शासकों और उनके उत्तराधिकारियों द्वारा 18वीं शताब्दी में एक गुप्त सैन्य अड्डा था. यह रंगपुर पैलेस का एक हिस्सा था और ताई अहोम वास्तुकला के सबसे शानदार उदाहरणों में से एक है. इसमें वास्तव में दो गुप्त सुरंगें और जमीनी स्तर से तीन मंजिल नीचे हैं जो अहोम युद्धों के दौरान निकास मार्गों के रूप में इस्तेमाल किए गए थे.

सुरंगों में से एक 3 किमी लंबी है और Dikhow नदी से जुड़ती है और दूसरी 16 किमी लंबी पलायन मार्ग है जो गढ़गांव पैलेस की ओर जाता है. इन सुरंगों का इस्तेमाल अहोम राजाओं ने अपने सभी युद्धों के दौरान बचने के मार्ग के रूप में किया था या ऐसा कहा जा सकता है कि दुश्मन के हमले के दौरान इन मार्गों को भागने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

 4.अंबर पैलेस जयपुर 

अंबर पैलेस को आमेर किला या अंबर किला कहा जाता है. इस पैलेस को जयगढ़ किले से जोड़ने वाली एक ओपन एयर टनल है. यह लगभग 325 मीटर लंबी है और कहा जाता है कि इसे 18वीं शताब्दी में बनाया गया था. इसका उद्घाटन 2011 में एक पर्यटन स्थल के रूप में किया गया था.

 5.लाल किला 

ऐसा कहा जाता है कि भारत में लाल किले से ज्यादा रहस्यमयी कोई जगह नहीं है. यह शाहजहाँ द्वारा निर्मित 17वीं शताब्दी का किला है और वह स्थान भी जहाँ से प्रधानमंत्री हर साल स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते हैं.

इसे कई सुरंगों और गुप्त मार्गों का घर कहा जाता है, जो हाल ही में दिल्ली राज्य विधान सभा में पायी गई है. किले में लाहौरी ईंटों से बना एक कक्ष भी है, जिसके बारे में संदेह है कि यह हथियारों और गोला-बारूद का घर है जो उन्हें धूप से सुरक्षित रखता है. इसमें एक गुप्त सुरंग भी है जो मुगल संरचना को यमुना नदी से जोड़ती है.

 6.परगवाल सुरंग, जम्मू 

इस सुरंग की खोज भारतीय सेना ने 2014 में की थी. यह 20 फीट गहरी सुरंग है जिसका अभी तक कोई छोर नहीं मिला है.

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